शोपीस बनी सिग्नल लाइट, फिर भंगार की स्थिति में ट्रैफिक सिग्नल लाइट्स, ट्रैफिक जाम से घिरा शहर का हर चौराहों और आमजन, दुकानदारों सहित छोटे बड़े व्यापारियों ने नहीं बनाई पार्किंग भी निगम में में पास हो गया नक्शा और मिल गई परमिशन, नियम का हो रहा उल्लंघन
Signal lights becomes again showpiece there is no planing about traffic jam collector sp inspection the jam square
शोपीस बनी सिग्नल लाइट, फिर भंगार की स्थिति में ट्रैफिक सिग्नल लाइट्स, ट्रैफिक जाम से घिरा शहर हर चौराहों और आमजन, दुकानदारों सहित छोटे बड़े व्यापारियों ने नहीं बनाई पार्किंग भी निगम में में पास हो गया नक्शा और मिल गई परमिशन, नियम का हो रहा उल्लंघन
डेली जर्नल हिंदी डेस्क
रतलाम शहर में एक समस्याएं हो तो गिनाई जाए। समस्या अनेक लेकिन समाधान नील बंटा सन्नाटा। फिलहाल शहर ट्रैफिक जाम की स्थिति से गुज़र रहा है। लगातार जाम की शिकायतें आने पर कलेक्टर राजेश बाथम और एसपी अमित कुमार साथ चौराहों का मुआयना करने मंगलवार को शहर भ्रमण के लिए निकले थे। पहले कोर्ट चौराहे का निरीक्षण किया। क्योंकि यहां आए दिन नाश्ता प्वाइंट वालों की वजह से जाम लगा रहता है। वहीं इस क्षेत्र में एक व्यवस्थित पार्किंग नहीं होने से अधिक समस्या है। बढ़ती जनसंख्या के साथ साथ टू व्हीलर मोटरसाइकिल सहित अन्य वाहनों की बिक्री भी बढ़ती जा रही है। पिछले तीन साल का टू व्हीलर वाहन की बिक्री में देखे तो 25 से 30 हजार वाहन हर साल बिक रहे है। इससे वाहनों की बढ़ती संख्या से भी जाम का भी अंदाजा लगाया जा सकता है। बहरहाल जिस तरह वाहनों और लोगों की संख्या बढ़ रही उसके मुताबिक शहर में कोई सुधार नहीं हो पा रहा। सिटी फोरलेन तो बनाई लेकिन आधे से ज्यादा तो दुकानदार सड़क तक अतिक्रम कर बैठे है। जैसे बाल चिकित्सालय वाली सड़क तो टू लेन का ही काम करती है। ऐसे कई इलाके है जहां अतिक्रमण पसरा हुआ है।
जिम्मेदार नहीं समझ रहे अपनी जिम्मेदारी
शहर में आए दिन जाम जैसी स्थिति रहती है। यह बात जनप्रतिनिधि से लेकर प्रशानिक अधिकारी सहित अन्य जिम्मेदार अधिकारियों को भी ज्ञात है। यातायात पुलिस तो अब केवल चलान बनाने में व्यवस्त रहती है। लेकिन जिस समय अधिक जाम होने की संभावना बनती है उस समय जिम्मेदार यातायात पुलिस मिस्टर इंडिया बन जाती है। जाम लगता है लगने दो, किसी को कोई मतलब नहीं रहता। बीते मंगलवार की 1.15 बजे के आसपास लोकेंद्र टॉकीज चौराहा लावारिस पड़ा हुआ था। जनता और वाहन चालक खुद ब खुद ही जाम से निकल कर पीछा छुड़ा रहे थे। जबकि जिम्मेदार को पता है कि किस समय पर कौनसा चौराहा अधिक व्यस्त हो जाता है तब भी जिम्मेदार गैर जिम्मेदार बन जाते है। नए आए डीएसपी साहब को तो जैसे कोई मतलब नहीं है। मीडिया के द्वारा बताए जाने के बाद भी उनकी उनकी कोई प्रतिक्रिया नहीं आती। जबकि उनको ग्रुप में टैग कर उन्हें बताया जाता है।
सिग्नल लाइट्स को तो अब तक आए कोई भी कलेक्टर नहीं शुरू करवा पाए
अब बात करें चौराहों पर शो पीस की तरह सजी सिग्नल लाइट की तो ये लाइट लगाने का मकसद ही समझ नहीं आया जब इन्हें बंद ही रखना था। इससे पहले लगी सिग्नल लाइट भी बंद पड़ी भंगार हो गई थी फिर लाखों रुपए खर्च कर फिर से इन्हें लगाई गई। लेकिन मजाल है कि जिले के अब तक मालिक भी इन्हें शुरू करवा पाए हो। बीच में खबर उड़ाई गई थी कि रतलाम इनकी सिग्नल लाइट की जरूरत ही नहीं है। बचपन से चौराहों पर लाल हरी और पीली बत्ती के बारे में स्कूलों में यातायात सुरक्षा अभियान के तहत शिक्षा लेते आ रहे है। तो अब इसकी अनावश्यकता क्यों हो गई। जबकि हर चौराहों पर वाहनों की भीड़ का अलम देखा जा सकता है। उदाहरण के लिए कोर्ट चौराहा, दो बत्ती चौराहा, सैलाना बस स्टैंड चौराहा, लोकेंद्र टॉकीज चौराहा, शहर सराय, शाहिद चौक, घांस बाजार, चांदनीचौक, नौलाईपुरा, राम मंदिर, कस्तूरबा नगर चौराहा मुख्य रोड, लोहार रोड़ चौराहा सहित कई चौराहे जाम के शिकार है और समय समय पर भारी जाम हो जाता है। वहीं मित्र निवास कॉलोनी कालिका माता मंदिर के सामने स्थित सेंट जोसफ कॉन्वेंट स्कूल का इतना बड़ा कैंपस होने के बाद भी इस स्कूल के पास इसकी अपनी पार्किंग नहीं है। सभी स्टूडेंट्स बाहर सड़क किनारे और कोर्ट के सामने फुटपाथ पर खड़ी करते है। जबकि फुटपाथ चलने के लिए है ना कि पार्किंग के लिए। इस पर आज दिन तक कोई करवाई ही नहीं करवा पाया शायद जो अधिकारी रतलाम आते पहले के अधिकारियों की तरह जाम हो जाते।
शहर में नहीं व्यवस्थित पार्किंग, निगम के नियम मुताबिक हर दुकानदार की पार्किंग जगह होना आवश्यक
शहर में पार्किंग व्यवस्था देखें किसी दुकानदार याने छोटे व्यापारी से लेकर बड़े व्यापारी के पास पार्किंग की सुविधा ही नहीं है। जबकि नगर निगम के नियम के मुताबिक दुकान के बाहर दुकान की पार्किंग नक्शे में होना आवश्यक है, तो ही नक्शा पास करवाने के साथ ही परमिशन दी जाती है लेकिन शायद किसी भी दुकानदार, स्कूल, होटल मैरिज गार्डन के पास ना के बराबर ही पार्किंग है। जगह की लालच में ये पार्किंग नहीं बनते है और भुगतना ग्राहकों और आमजन को पड़ता है। ऐसे में जिम्मेदार भी गलती है कि बिना पार्किंग के दुकान के नक्शे कैसे पास हो गए। शहर में कई मैरिज गार्डन है जिसमें पार्किंग की सुविधा ही नहीं है या फिर हॉल की साइज के मुताबिक नहीं है।
अब तक कई महापौर, कमिश्नर, कलेक्टर बदल गए लेकिन पार्किंग सहित ट्रैफिक जाम का नहीं हो पाया समाधान
शायद रतलाम को कुछ लोग बदलना ही नहीं चाहते। आज भी कई समस्याएं है जो रतलाम को अपनी पुरानी हालत पर ही रोने को मजबूर कर रही है। जिम्मेदार अफसर आते, निरीक्षण करते लेकिन समाधान नहीं निकलता। एसपी अमित कुमार द्वारा भी ट्रैफिक जाम होने जैसे चौराहों का खूब निरीक्षण किया लेकिन वो निरीक्षण निरीक्षण ही रहा गया, धरातल पर कोई कार्य नहीं हो पाया, सिग्नल लाइट्स को तो मानो जैसे श्राप सा लग गया हो। ट्रैफिक का कोई मैनेजमेंट नहीं। पूरे मामले को समझने मास्टरमाइंड प्लानिंग, आलस छोड़, धरातल पर कार्य करने की जरूरत है। सख्त कार्रवाई हो ताकि जनता को भी अपनी जिम्मेदारी का अहसास हो। और हां नेतागिरी करने वाले पर तो खास कार्रवाई हो।
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